Monday, 3 July 2017

Krishna Kathayein - Tales of Shri Krishna Part-2

उसके एक ही प्रकार से शहर में भी छेद हो जाए वह पहले तो भयंकर रूप से बार-बार श्रीकृष्ण का प्रयास करने लगा और श्री कृष्ण मुस्कुराते रहे उन पर क्या कसूर के भय का कोई असर नहीं हुआ वह क्रोधित होकर बालकृष्ण को मारने के लिए छपता बालरूप भगवान श्रीकृष्ण ने बड़े हादसे कस कर कार्यालय को पकड़ लिया उसके प्राण छटपटाने लगे भगवान ने उसे घुमाकर इतनी जोर से कहो कि वह कल सके सभा मंडल में जा गिरा बड़ी मुश्किल से उसे होश में लाया गया कंस ने घबरा कर उससे पूछा तुम्हारी यह दशहरे की का कसूर ने कहा राजन जिसने मेरी गर्दन मरोड़ कर यह फेक दिया वह कोई साधारण बालक नहीं हो सकता निश्चित ही भगवान श्रीहरि ने कर लिया है एक दिन की बात है यशोदा मैया गोपी का के साथ कान्हा की बाल सुलभ लीलाओं की चर्चा कर रही थी जो खेलते-खेलते अचार दृष्टि चंद्रमा पर पड़ी उन्होंने पीछे से आकर यशोदा मैया का घूंघट उतार दिया अपने कोमल करों से उनकी चोटी पकड़ लिया खींचने लगे और बार-बार पीठ थपथपाने लग श्रीकृष्ण बोले मां मैं लूंगा मैया की समझ में बात हो गई तो श्रीकृष्ण को गोद में ले लिया और पूछा लाला तू ही क्या चाहिए हो साफ-साफ बताओ दूध दही मक्खन मिश्री जो चाहोगे वो मिलेगा अब मान भी जाओ रूठो मत श्रीकृष्ण ने कहा घर की वस्तु नहीं चाहिए उन्होंने अंगुली दिखाकर चंद्रमा की ओर संकेत किया और कहा वह चाहिए गोपियां बोली वह मेरे बाप यह कोई माखन का लौंडा थोड़े है हाय हाय यह हम कैसे देंगी यह तो प्यारा प्यारा हंस है जो आकाश सरोवर में तैर रहा है श्रीकृष्ण ने कहा मैं भी तो खेलने के लिए कुछ हंस को ही मांग रहा हूं कि घर का करो पार जाने के पहले ही उसे ला दो यशोदा जी ने कन्हैया को गोद में उठा लिया और कहा कान्हा जम्मू राजहंस है मैं चंद्रमा यह माखन का लौंडा है किंतु तुम्हें देने योग्य नहीं है देखो ना इस में काला काला भूख लगा हुआ है इसीलिए इसे कोई नहीं खाता श्रीकृष्ण ने कहा मैया मैया इसमें विश कैसे लग गया यशोदा जी ने कान्हा को गोरा हैकर कथा सुनाना प्रारंभ कर दिया यशोदा ने कहा लाला एक खीर सागर है श्री कृष्ण वह कैसा है मैया यशोदा बेटा कहां हो तुम जो दूध देख रहे हो ना इसी का एक समंदर है श्रीकृष्ण मैया कितनी गायों ने दूध दिया होगा तब समुद्र बना होगा यशोदा यह गाय का दूध नहीं है श्रीकृष्ण मैया तुम मुझे बहला रही है भला बिना गाय के भाव दूध नहीं होता है यशोदा जिस भगवान ने गायों को बनाया वह बिना गायों के भी दूध बना सकते हैं श्रीकृष्ण अच्छा ठीक है आगे कहां है यशोदा एक बार देवता और व्यक्तियों में युद्ध हुआ सत्य बलवान रहे हो बार-बार देवताओं को हरा भगवान ने देवताओं को अमर बनाने के लिए खीर सागर को माथा मंदराचल की मथानी बनी और वासुकि नाग की रस्सी बनाई गई एक तरफ देवता लगे और दूसरी सत्य श्री कृष्ण जय श्री गोपियां दही मथती है शोदा हरियाणा उसी से कालकूट नामक विश पैदा हुआ श्रीकृष्ण मां विष्णो सांपों में होता है दूध में कैसे निकला यशोदा बेटा वही विष भगवान शंकर ने पी लिया उससे जो धरती पर खुशियां पड़ी उसे पीकर सांप विषधर हो गए यशोदा ने कन्हैया को चलाने की ओर दिखाकर कहा यह मक्खन भी उसी से निकला है इसीलिए थोड़ा सा विश इसमें भी लग गया इसी को गलत कहा जाता है इसीलिए थोड़ा घर का


मक्खन खाओ इस मक्खन को पाने के भूल कर भी मत सोचना कथा सुनते सुनते कन्हैया को नींद आ गई और चांद खिलौना की बात चले आओ जहां की तहां रह गई गोकुल में चारों तरफ आनंद ही आनंद छाया रहता था वहां के निवासी श्री कृष्ण की बाल सुलभ लीला देखते नहीं लगाते थे और श्री कृष्ण नित्य नूतन लीला से सब को हिंदी में सराबोर करते थे नंदबाबा के भाग्य का तो कहना ही क्या था उनके सौभाग्य को देखकर बड़े-बड़े तपस्या मुनि भी सराहना करते थे भला साक्षात आनंदघन परमात्मा ही जिनके बालक बनकर चावला से जिन को रिझाने के लिए नित्य प्रति नवीन लीला की योजना बनाते हैं उनके सौभाग्य की बराबरी कौन कर सकता है एक दिन नंदबाबा क्यों होते की भांति प्रातः काल अपने इष्ट भगवान शालग्राम के पूजन अर्चना के लिए पूजा ग्रह में गए तनहाई भी नवीन लीला करने के उद्देश्य से छिपकर उनके पीछे पीछे लग गए नंद बाबा ने चाहा और जी को स्नान करवाया चंदन फूल माला चढ़ाया उनका सुंदर वस्त्र और आभूषणों से श्रृंगार किया भोग लगाया उसके बाद उन्होंने मधुर स्वर में ठाकुर जी की आरती की फिर आंखे मूंद ठाकुर जी से उन्होंने आओ प्रार्थना करते हुए कहा दीनानाथ कन्हैया के सलोने मुखड़े और मधुर चितवन ने मुझ पर जादू कर दिया है मैं जब कभी आपका ध्यान करता हूं मुझे लगता है कि कन्हैया ही कन्हैया चारों तरफ दिखाओ है उसे छोड़कर मुझे संसार की सारी वस्तुएं भूल गई है चलते फिरते उठते-बैठते सारा संसार कृष्णमय लगता है मुझे लगता है कि मैं पूजा पाठ रहा हूं बोलता जा रहा हूं प्रभु यदि मुझसे कुछ भूल हो गई हो तो मुझे क्षमा करना यह कहकर नंदबाबा ने ठाकुर जी को बार-बार दंडवत फिर ध्यानस्थ होकर बैठ गए गोपाल अभी खिंच आया हूं दूर से नंद बाबा की पूजा देख रहे थे जब उन्होंने देखा कि बाबा ने आंखें मूंद ली है उनके मन में एक नया खेल सूझा वह धीरे-धीरे पैर दबा अपनी बाबा के पास पहुंचे ताकि उनकी आहट सुनकर बाबा रहा न टूटे मैं थोड़ी देर तक चुपके से ठाकुर जी के पास बैठ कर रहा है वक्त की लगाए उन्हें देखते रहे फिर ठाकुर जी को सिहासन से उठाकर अपने मुख्य में रख लिया और धीरे से अपने स्थान पर आकर लेट गए इधर जैसे ही नंदबाबा का ध्यान टूटा है वह सामने सिंहासन से ठाकुर जी को गायब पाया उनके आश्चर्य का ठिकाना ना रहा सोचा अभी अभी तो मैंने पूजन करके ठाकुरजी को सिंहासन पर आया हुआ घर आया था कि अचानक कहां चले गए नंदबाबा घबराकर चलाओ है नंदनी नंदनी तू कहां है जल्दी आओ आज तो महान आश्चर्य हो गया अभी-अभी में ठाकुर जी उनके सिंहासन पर पधार कर उनका ध्यान कर रहा था तो अचानक पता नहीं कहां गायब हो गए कहीं तुमने तो उन्हें उठाकर चाह नहीं रख दिया है अचानक उन्होंने देखा उनका प्यारा लाडला कन्हैया आओ ठाकुर जी को अपने मुंह में रखे हुए मंद मंद मुस्कुरा रे कन्हाई क्यों काटते हुए कहने लगे नटखट तुमने ठाकुर जी को मुख में रख लिया क्योंकि महिमा को क्या जानो यह साक्षात मेरे प्रभु है तो मैं इन्हें मुख में रखकर उनका अपमान किया है चलो उठो जल्दी से इन्हें मुझे दे दो और प्रणाम करके इनसे क्षमा मांगो कन्हैया ने बाबा की आज्ञा मानकर वैसा ही किया धन्य है वो दुखी प्रभु की वह तृतीय लीला एक दिन कान्हा को एक नई लीला सुझाव भगवान का काम


नित्य नई-नई लीलाएं करके को आनंदित करना था पूर्व जन्म में नंदबाबा और यशोदा मैया ने जान की उपासना करके भगवान से पुत्र रूप में वात्सल्य सुख की ही तो प्रार्थना की थी भगवान उस इच्छा को अधूरी कैसे रहने देते इसलिए वह नृत्य नवीन पांडे लीला से मां को रिझाने का प्रयास करते थे कान्हा नंद के चरणो मे आंगन में घुटनों के बल कि अधिकारी मारते हुए खेल रहे थे अचानक उनकी दृष्टि अपनी परछाई पर पड़ी तो उन्हीं का अनुकरण कर रही थी क्या जब भी हंसते तो परछाई हंसती थी जब चलते तो परछाई चलती थी कन्हैया बहुत खुश हुए सोचा चलो एक नया साथी मिल गया घर में अकेले खेलते खेलते मेरा मन खुश हो जाता है अब यह रोज मेरा मन बहलाया करेगा कन्हैया अपनी परछाई से बोले भैया तुम कहां रहते हो चलो हम दोनों मित्र बन जाएं कहां हो जब मैं माखन खाऊंगा तो तुम्हें भी खिलाऊंगा जब दूध पियूंगा तो तुम्हें भी पिलाऊंगा चलाओ भैया मुझसे बड़े हैं इसलिए वह मुझसे लड़ जाते हैं तुम मुझसे लड़ना नहीं हम लोग खूब प्रेम से रहे हो देखो ना यहां किसी भी चीज की कोई कमी नहीं है तुम्हें गाना माखन मिश्री चाहिए मैं तुम्हें मैया से कहकर दिला दूंगा आओ हम दोनों आपस में गले मिल ले ताकि आज से मित्रता अच्छा हो जाए इस प्रकार कहते हुए कन्हैया बार-बार अपनी छत जीने का प्रयास करने लगे बार-बार आगे पीछे इधर-उधर घूमते किंतु परछाई किसी की पकड़ में आई है क्या कि कन्हैया की पकड़ में आ जाती जब थक कर हार गए किसी प्रकार भी ना पकड़ सके तो दुखी हो गया यार श्याम के दुखी हो परछाई भी दुखी दिखाई देने लगी अपने लाल का मुखड़ा गाना देखकर यशोदा मैया नजदीक गई ध्यान से उन्होंने कन्हैया की तरफ देखा कन्हैया की आंखें डबडबा आई उन में आंसू भर गए हैं उनका आंचल पकड़कर सुबक सुबक कर रोने लगे मां ने पूछा कन्हैया तुम्हे क्या हो गया तुम क्यों रो रहे हो क्या है श्रीकृष्ण ने माता को अपना प्रतिबिंब दिखाकर बात बदल दी जय श्री कृष्ण बोले मैया मैया यह कौन है क्या वह लोग वह तुम्हारा माखन चुराने के लिए घर में घुस आया है मैं बार-बार मना कर मानता ही नहीं मैं क्रोध करता हूं तो यह भी क्रोध करता हूं मैया आओ ना हम दोनों मिलकर इसे बाहर कर दें नहीं तो यह तुम्हारा सब माखन खा जाएगा मैया कन्हैया के इस भोलेपन पर मुक्त हो गई क्या और कंहैया के आंसू पोंछ कर उन्हें गोद में ले लिया एक दिन माता यशोदा दही मत कर माखन निकाल रही थी अचानक मां को आनंद देने के लिए बल राम और श्याम उनके निकट पहुंच गए कन्हैया ने मटकी फोड़ी पकड़ ली और बलराम ने मोतियों की माला दोनों मां को अपनी तरफ खींचने का प्रयास करने लगे बलराम कहते थे मां पहले तुम मेरी सुनो और कंहैया कहते थे नहीं मां पहले तुम मेरी सुन मैया मुझे बड़ी जोरों की भूख लगी है भूख से हारा बुरा हाल है चलो ना जल्दी से मुझे माखन रोटी दे दो देखो ना आए हैं खेलते खेलते बिल्कुल ही थक गया हूं मैं माखन रोटी खाकर जल्दी से सो जाना चाहता हूं यशोदा जी ने कहा बेटा दूध पी लो या घर में नाना प्रकार के पकवान बने हैं जो तुम्हारी इच्छा हो खा लो कन्हैया ने कहा नहीं मैं तो केवल माखन खाऊंगा मेवा पकवान तो मुझे बिल्कुल अच्छे नहीं लगते जब तक तुम मुझे माफ कर नहीं दे दोगी तब तक मैं तुम्हारी छोटी खींचता ही रहूंगा मां ने कहा 

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