यक्ष भाषा
पर यक्ष जिस भाषा में पूछेगा प्रश्न
वह तो सीखनी रह ही गई
मां के दूध के साथ
तुतलाहट भरी
सीख ली थी वह पहाड़ी बोली
विद्वान जिसे कहते रहे अपभ्रंश
नारियल की फटी टाट पर
कौवे की क...का...पंचम स्वर में चलती रहती
जब तक घिस नहीं जाता था पाजामा
वह तो सीखनी रह ही गई
मां के दूध के साथ
तुतलाहट भरी
सीख ली थी वह पहाड़ी बोली
विद्वान जिसे कहते रहे अपभ्रंश
नारियल की फटी टाट पर
कौवे की क...का...पंचम स्वर में चलती रहती
जब तक घिस नहीं जाता था पाजामा
कविता बंजारन सी
बंजारन सी कविता।
पंख लगार सपनों के वो,
भ्रमण करे सारी सृष्टि,
जीवन के सूने पतझर में,
करे सदा अमृत वृष्टि,
होठों पे मुस्कान अमर सी, आंखों में बहती सरिता,
बंजारन सी कविता।
छान्द बने पायलिया इसकी,
लय चुनर सी लहराती,
पंख लगार सपनों के वो,
भ्रमण करे सारी सृष्टि,
जीवन के सूने पतझर में,
करे सदा अमृत वृष्टि,
होठों पे मुस्कान अमर सी, आंखों में बहती सरिता,
बंजारन सी कविता।
छान्द बने पायलिया इसकी,
लय चुनर सी लहराती,
तेरी आंखों में संसार
तेरी आंखों में संसार।
प्रेम पर निबंध लिखती,
भीनी-भीनी सी पवन,
आसमां देता निमंत्रण,
उडऩे को आतुर है मन,
पूछता है प्राण मुझसे,
कितना पांखों का विस्तार।
तेरी आंखों में संसार।
महक उठा मन का उपवन,
मधुर मिलन मदहोश घड़ी,
प्रेम पर निबंध लिखती,
भीनी-भीनी सी पवन,
आसमां देता निमंत्रण,
उडऩे को आतुर है मन,
पूछता है प्राण मुझसे,
कितना पांखों का विस्तार।
तेरी आंखों में संसार।
महक उठा मन का उपवन,
मधुर मिलन मदहोश घड़ी,
इस कोने में
काल का कबाड़-घर
काल के कबाड़घर में
पता नहीं कितना
कबाड़ भरा है।
इधर, इस कोने में
श्री-श्री 108, 1008
महामंडलेश्वर,
महाराजाधिराज, भूपति,
अखिलेश्वर,
योद्धा देहधारी,
आतंकी, आततायी,
भक्तगण, पंडे-पुजारी,
नेता-अभिनेता,
शब्द-शिल्पी साहित्यकार,
साधक, आराधक,
निपुण कलाकार,
चारण-भाट, दरबारी,
सामन्त और श्रीमन्त,
दस, बीस, तीस हजारी,
जाने कितने भरे हैं।
काल के कबाड़घर में
पता नहीं कितना
कबाड़ भरा है।
इधर, इस कोने में
श्री-श्री 108, 1008
महामंडलेश्वर,
महाराजाधिराज, भूपति,
अखिलेश्वर,
योद्धा देहधारी,
आतंकी, आततायी,
भक्तगण, पंडे-पुजारी,
नेता-अभिनेता,
शब्द-शिल्पी साहित्यकार,
साधक, आराधक,
निपुण कलाकार,
चारण-भाट, दरबारी,
सामन्त और श्रीमन्त,
दस, बीस, तीस हजारी,
जाने कितने भरे हैं।
आखिरी दिनों में
टूटकर कभी जुड़ता
नहीं
आपसी विश्वासों पर
खड़ा है
दुनिया के किसी भी
बचत बैंक से
बड़ा है
गुल्लक बिटिया का
अक्सर टूट जाता है
अब
माह के
आखिरी दिनों में
मां कहती है
नया
खरीदकर लायेंगे
पहले से
ज्यादा पैसे बचायेंगे
नहीं
आपसी विश्वासों पर
खड़ा है
दुनिया के किसी भी
बचत बैंक से
बड़ा है
गुल्लक बिटिया का
अक्सर टूट जाता है
अब
माह के
आखिरी दिनों में
मां कहती है
नया
खरीदकर लायेंगे
पहले से
ज्यादा पैसे बचायेंगे
प्रगति
हरितक्रांति
हरित क्रांति का निरीक्षण
करते-करते
कभी ऊपर देखते, कभी नीचे देखते
आजू-बाजू की हरियाली निहारते
देश के कृषि मंत्री महोदय
मंूगफल्ली के खेत में पहुंचे
और लहलहाती फसल देखकर
किसान से पूछे
फल कहां है?
मुझे तो लगता है
करते-करते
कभी ऊपर देखते, कभी नीचे देखते
आजू-बाजू की हरियाली निहारते
देश के कृषि मंत्री महोदय
मंूगफल्ली के खेत में पहुंचे
और लहलहाती फसल देखकर
किसान से पूछे
फल कहां है?
मुझे तो लगता है
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