ऐसे सभी मकान बने हैं।
दीवारों में कान बने हैं।।
मेरे दो, जमाने भर में।
मेरी अब पहचान बने हैं।।
कहने को ये मेरा घर है।
जिसमें हम मेहमान बने हैं।।
दुश्मन है जाना पहिचाना।
क्यों हम सब अनजान बने हैं।।
घर आंगन में है अंधियारा।
दीवारों में कान बने हैं।।
मेरे दो, जमाने भर में।
मेरी अब पहचान बने हैं।।
कहने को ये मेरा घर है।
जिसमें हम मेहमान बने हैं।।
दुश्मन है जाना पहिचाना।
क्यों हम सब अनजान बने हैं।।
घर आंगन में है अंधियारा।
पहले तोल लो
गुफ्तगू करने से पहले तोल लो
हरकिसी से दुश्मनी मत मोल लो
ठोकरें खाओगे सारी किान्दगी
है यही बेहतर कि आंखें खोल लो
न$फरतें भी काम आयेंगी कभी
न$फरतों में प्यार का रस घोल लो
वक़्त आयेगा हमारा भी काुरूर
तुमको जितना बोलना है बोल लो
हरकिसी से दुश्मनी मत मोल लो
ठोकरें खाओगे सारी किान्दगी
है यही बेहतर कि आंखें खोल लो
न$फरतें भी काम आयेंगी कभी
न$फरतों में प्यार का रस घोल लो
वक़्त आयेगा हमारा भी काुरूर
तुमको जितना बोलना है बोल लो
तुंद तूफान भर
तुंद तूफान भर के नावों में
हम फंसे तेका-रौ बहावों में
तापने और अब कहां जाएं
आग बुझने लगी अलावों में
रहबरों ने भी हमको लूटा है
राह के नित नए पड़ावों में
लोग नादान हों कि हों दाना
पिस रहे वक्त के दबावों में
हम फंसे तेका-रौ बहावों में
तापने और अब कहां जाएं
आग बुझने लगी अलावों में
रहबरों ने भी हमको लूटा है
राह के नित नए पड़ावों में
लोग नादान हों कि हों दाना
पिस रहे वक्त के दबावों में
चांद तक हमने
चांद तक हमने जाके देख लिया
रूख से पर्दा हटाके देख लिया
भीड़ है, भीड़ में है तन्हाई
शहर में हमने आके देख लिया
बक का कौन इन्तजार करे
आशियां खु़द जलाके देख लिया
उम्रभर साथ देगी वीरानी
रूख से पर्दा हटाके देख लिया
भीड़ है, भीड़ में है तन्हाई
शहर में हमने आके देख लिया
बक का कौन इन्तजार करे
आशियां खु़द जलाके देख लिया
उम्रभर साथ देगी वीरानी
मुझे पुकारते रहना
मुझे पुकारते रहना कभी न आऊंगा
तुम्हारी काद से बहुत दूर चला जाऊंगा
अबी तो मेरे सितारे निहां है गर्दिश में
तुम्हारे वास्ते कल आफताब लाऊंगा
अंधेरी रात में गुमगश्त, जो मुसापिर है
चरा$ग उनके लिए भी मैं इक जलाऊंगा
मैं चल पड़ा हूं सफर पे मुझे न यूं रोको
गुजश्त दौर के किस्से सुना न पाऊंगा
जो इंतिकाार में मेरे हैं एक अर्से से
तुम्हारी काद से बहुत दूर चला जाऊंगा
अबी तो मेरे सितारे निहां है गर्दिश में
तुम्हारे वास्ते कल आफताब लाऊंगा
अंधेरी रात में गुमगश्त, जो मुसापिर है
चरा$ग उनके लिए भी मैं इक जलाऊंगा
मैं चल पड़ा हूं सफर पे मुझे न यूं रोको
गुजश्त दौर के किस्से सुना न पाऊंगा
जो इंतिकाार में मेरे हैं एक अर्से से
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